Tuesday, February 16, 2021

ज्वार

ज्वार
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बहुत ही सुन्दर था उसका प्रेमी
या फिर उसे खोने से डरती थी वो,

इसलिए छुपा रखा था
उसे अपने हृदय तल में।

केवल दानव ही नहीं
देव भी डरा करते हैं सच्चे प्रेम से।

और फिर, जग कल्याण के नाम पर
कर दिए गए दोनों विलग।

जब इस विरह से हो आकुल
उसका जलन पहुँचता है चरम पर,
या फिर दुःख से वो
छुप जाता है किसी स्याह कोने में,
उफन आती है वो
उसे अपने शीतल आलिंगन में भर लेने को।

ठीक इसी वक्त मुस्कुरा उठता है
खिदिरपुर डॉक में ज्वार के लिए प्रतीक्षारत प्रेमी

और मुस्कुरा उठती है एक बिंदी
सुदूर अंडमान में।

जल और चन्द्रमा तो मिल नहीं पाते,
लेकिन इनके विरह के ज्वार से गति पाकर,

कई जलयान दौड़ पड़ते हैं,
बिछड़े प्रेमियों को मिलाने को।
©
वेद

(ऐसा माना जाता है कि समुद्र मंथन में समुद्र के अंदर से चाँद निकला था; अमावस्या और पूर्णिमा को समुद्र में उच्च ज्वार आता है)

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