Tuesday, April 7, 2015

कब बड़ा हुआ मैं ?


"पापा , हम बड़े कब होंगे?"
आज तक़रीबन 30 साल पुरानी डायरी के पन्ने पलटते हुए; बीते लम्हों को जी रहा था। और
इस प्रश्न पर नज़र पड़ते ही अटक सा गया।
ये डायरी मैंने तब लिखनी शुरू की थी जब सारिका ने एक रात मेरी तरफ पीठ कर के लेटे लेटे
मेरे हाथ को अपने पेट पर रख कर पूछा था की कुछ पता चला ?
श्रेयस के आने का ये पहला संकेत था।
ये डायरी श्रेयस के नाम थी।
मैंने इसमे श्रेयस के बारे में सब कुछ लिखना शुरू किया। हाँ, जब शुरू किया तो ये पता नही था
की श्रेयस के लिये लिख रहा हू या कासवी के लिये ।
सारिका के पेट के अन्दर उसके उछलने की frequency का भी जिक्र है इस डायरी मे।
फिर वो दिन भी आया जब पता चल गया की ये डायरी कासवी की न होकर श्रेयस की है।
नर्स ने बहुत ही सुन्दर से gift wrap की तरह एक towel मे लपेट कर श्रेयस को हमारे हवाले किया
था।
इसी डायरी के एक पन्ने पर तुम्हारा ये प्रश्न मिला। तब तुम 4 साल 3 महीने और 12 दिन के
थे।
पता नहीं उस समय क्या जवाब दिया था। शायद ये कहा था की जब तुम खुद से खाना खाने
लगोगे या फिर जब तुम साइकिल चलाने लगोगे या फिर जब तुम कॉलेज जाने लगोगे या फिर
कुछ और.....
लेकिन आज ये यक्ष प्रश्न मेरे सामने खड़ा है।
मै कब बड़ा हुआ ?
और तुम्हारे लिये लिखी डायरी में अंकित ये प्रश्न मुझे मेरे अतीत मे ले गया।
कई चीजें जहन मे उथल पुथल मचाने लगी।
कब बड़ा हुआ था मै ?
क्या तब, जब स्कूल रिक्शा से जाना बचकाना लगने लगा और मैंने अपनी साइकिल मे स्कूल
जानी शुरू की ?
या फिर तब, जब स्कूल से कॉलेज मे प्रवेश पाया ?
या फिर तब, जब हॉस्टल मे सीनियर्स ने पैंट उतारने को कहा और मैंने निसंकोच उतार दिये ?
या फिर तब, जब कुछ दिनों बाद एक अकेले सीनियर ने रूम मे पैंट उतार कर बेड पर आने को
कहा और मैंने उसकी नाक फोड़ दी और उसी दिन से हमारे बैच की रैगिंग बंद करा दी ?
या फिर तब, जब कॉलेज मे लेक्चर के दौरान प्रोफेसर की आँखों मे आँख डाले क्लास से
निकल आया करता था?
या फिर तब जब पिताजी को मुखाग्नि दे कर भी आंसू नही निकलने दिया ?
या फिर तब, जब प्रथम सैलरी से माँ को साड़ी देकर उनको रुलाया ?
या फिर तब, जब सारिका और मै; अपने अपने घरो मे हमारे लिये बात करने की सोच ही रहे थे
और उसके एक "पूर्व प्रेमी " ने उसके लिखे खतों का एक पुलिंदा मुझे डाक से भेजा था और मैंने
उन्हें अग्नि देव को समर्पित कर दिया था?
या फिर तब, जब सारिका के मांग मे सिंदूर भरते हुए एक नयी जिम्मेवारी का सुखद अहसास
हुआ था ?
या फिर तब, जब सारिका और मै लज्जा शब्द को अँधेरी रातों मे भूल जाते थे ?
या फिर तब, जब श्रेयस आया हमारी ज़िन्दगी में ?
या फिर तब, जब माँ और सारिका के एक मामूली मतभेद के दौरान मैंने माँ को उपदेश दिया
था और वो चुपचाप सुन ली थी ?
या फिर तब, जब माँ को मुखाग्नि दे कर फुट-फुट कर रो पड़ा और ये समझ पाया की पिता
को मुखाग्नि देने के बाद किसके साया की सहायता से मैंने आंसू रोके थे?
या फिर तब, जब श्रेयस ने अमेरिका से फ़ोन पर बताया था की subway का beef टिकिया
बहुत ही tasty होता है और मैंने उसे बस ये कहा था की माँ को मत बताना?
या फिर तब, जब सारिका सदा के लिए छोड़ गयी फिर भी मै खड़ा रह पाया ?
या फिर तब, जब श्रेयस और उसकी पत्नी यानी तानी की वो बाते बुरी लगनी बंद हो गयी,
जो कभी लगा करती थी।
या फिर तब, जब श्रेयस के जीवन मे छोटा श्रेयस यानी श्वेतांक आया?
कब हुआ मै बड़ा ?
इस यक्ष प्रश्न का क्या है उतर ?
इसी यक्ष प्रश्न मे उलझा था की श्वेतांक कमरे मे आया और खेलने की जिद करने लगा।
मन विचलित होने के कारन मैंने लगभग डांटते हुए मना कर दिया।
इसपर उसने कहा की इतने बड़े हो कर भी आप मुझे नाराज़ कर रहे हैं, बड़े लोग किसी को
नाराज़ नही करते।
आह!! जिन यादों के ढेर मे अपने प्रश्न का उतर खोज रहा था, वहां तो उतर था ही नही।
बड़ा तो मै तब था, जब मैने किसी को नाराज़ नहीं किया था, जब मैंने किसी का दिल नहीं
दुखाया था।
बड़ा तो मै तब था जब मै माँ के गर्भ मे था और तब था जब माँ के स्तन मे ही मेरी क्षुधा का
समाधान था। बड़ा तो तब था जब मैंने बोलना और चलना भी शुरू नही किया था। हर गुजरते
दिन के साथ मै छोटा होता गया। और धीरे धीरे विलुप्त हो जाऊंगा। तब श्रेयस मुझे अग्नि
देव को समर्पित कर आयगा।

Saturday, March 21, 2015

Melli Flu


"I'm nervous....so...nervous."

"Arreee yaar!!! it's going to be just a formal tele-interview."

".....but...you know na that I stammer."

"No, I don't know. Though you have tried to inform and convince me about that."

"Don't fool me. I know you want me to be confident so you don't acknowledge that I stammer."

"You are mellifluous. Trust me, you are mellifluous."

"People go blind in love but you have gone deaf in love."

"You are my Melli Flu and I don't care how the world perceive to your voice. For me you have the sweetest voice my Melli Flu."

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"Papa, please type " MF Y" and send it to 56924"

" What for?"

"Areeee...I had told you na that a US girl is singing superbly in the reality show " sur ki nadiyan". It's her code. She is in last 10. Now she needs audience's vote to move to next round."

"OK, first let me listen to her voice. Tonight I'll watch the repeat telecast."

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At night while watching "sur ki nadiyan" I heard the anchor saying, " now the US little angel Melli Flu will sing the song............. "

The name took me back to some 18   years when my Melli Flu moved to US after clearing the formal Tele-interview. Before moving, she had said that once I go to US it won't be possible to come back and I had requested her to record a song for me in her mellifluous voice which she had denied sternly. On my repetitive request she had said that one day Melli Flu will sing for me.

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When TV camera zoomed to audience section I could recognize a lady clapping and smiling over the performance of Melli Flu.

I took my cell and typed "MF Y"

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Saturday, March 14, 2015

Blue Tick

नोकिया 3310 के vibration से नींद खुली तो देखा की एक sms blink कर रहा था। सन् 2000, blink sms का क्रेज़ था। और मेरे cell पर ब्लिंक sms मतलब "उसका sms"|

मैंने बिना पढ़े ही delete कर दिया। और फिर दो घंटे के ही अंतराल मे तकरीबन 25_30 SMS और लगभग इतने ही कॉल मैंने रिजेक्ट किये। अंततः मैंने SIM निकाला और दो टुकड़े कर डस्टबिन के सुपुर्द कर दिया। इसी शाम मुझे ट्रेन भी पकड़नी थी, घर लौट रहा था। company ने मेरा resignation स्वीकार कर लिया था।

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एक सप्ताह पहले तक सब कुछ सही था, सही ही नही सब कुछ स्वर्ग सा था। लेकिन पिछले शनिवार को जब उसने कहा की उसकी सारी कोशिशें बेकार चली गयी, उसके पैरेंट्स हमारे रिश्ते को स्वीकारने को तैयार नही थे। उसने कहा था की पापा already lung कैंसर से लड़ रहे हैं और मैं उनको और आघात नही दे सकती इसलिए मैं उन्ही लोगों के पसंद के लड़के से कल मिल रही हूँ। फिर हमारे बीच कोई बात नही हुई थी और आज अचानक से sms और कॉल्स की बौछार....शायद किसी ने मेरे resignation के बारे बता दिया हो और वो मुझे समझाने को कॉन्टेक्ट कर रही होगी।

खैर SIM के खत्म होते ही कॉन्टेक्ट करने के सारे ब्रिज भी ध्वस्त !!!!

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12 साल बाद, सूचना क्रांति ने फिर एक मोड़ पर मिला दिया। खैर अब तक सारे गीले शिकवे भी खत्म हो चुके थे। FB पर उसका FR आया था। अब वो USA मे थी। DP मे दो प्यारे बच्चे और एक handsome पति भी साथ था। फिर कभी कभार online hi-hello होने लगी। एक वीकेंड के दिन chat करते ये भी पता चला की वो SMSes और call मुझे ये बताने के लिए था की उसके पापा मान गए थे और वो कई महीनो तक मेरे कॉल का wait करती रही थी। इस दिन मैंने अपने जीवन मे दूसरी बार दारू पिया था....पहला 12 साल पहले का शनिवार था और एक ये शनिवार......

धीरे धीरे FB एक्टिविटी भी कम होती गयी और chat भी...लगभग नही के बराबर।

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1st Jan 2015 को WhatsApp पर एक नंबर से हैप्पी न्यू year का wish आया। DP देख समझ गया की ये उसका नया नंबर था। फिर से व्हाट्सएप्प पर occasional कॉन्टेक्ट और whatsapp forwards के थ्रू कॉन्टेक्ट revive हो गया था।

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मैं सामान्यतः WhatsApp के forwarded video और pics download नही करता हूँ, बिना देखे ही delete कर देता हूँ। 15 दिन पहले उसका कोई message आया था...pic था। as usual मैंने download नही किया। फिर क्या मन हुआ तो अगले दिन मैंने download किया। मेरे पैरो के नीचे से ज़मी सरक चुका था। It was her medical report. She had been diagnosed with terminal stage of blood cancer. समय देखा तो अंदाज़ लगाया की US मे अभी दोपहर हो रहा होगा। हिचकते हुए मैंने phone लगाया। फोने स्विच ऑफ मिला। whatsapp पर message छोड़ा लेकिन आज 15 दिन गुज़र जाने के बाद भी blue tick की प्रतीक्षा मे आँखे बेचैन है....बार बार उसका whatsapp window चेक करता हूँ। आज पहली बार उसका whatsapp status भी पढ़ा...जो दो साल पुराना है...शायद whatsapp install करने के साथ ही डाला होगा..."Don't dlt any message without reading"

Monday, January 5, 2015

अंधश्रद्धा

एक जंगल मे एक महात्मा रहते थे। नियमित रूप से वो संध्या ६ बजे ध्यान लगा कर
बैठा करते थे। एक दिन कहीं से एक बिल्ली उनके आश्रम मे आ
गयी। जब महात्मा ध्यान लगाने बैठे तो वो बिल्ली तंग करने
लगी। महात्मा ने शिष्यों से कहा की इसे पेड़ से बांध दो। उस दिन
के बाद से, महात्मा के ध्यान मे बैठने से पहले ही शिष्य उस
बिल्ली को बांध देते थे।
यही क्रम चलता रहा। समय के साथ महात्मा भी बदलते रहे
और बिल्ली भी।
एक दिन कोई जंगली जानवर आश्रम में घुस आया और
बिल्ली को उठा ले गया।
अगले दिन जब महात्मा ध्यान मे बैठने वाले थे तो उन्होंने देखा की पेड़ से कोई
बिल्ली बंधी हुई नही है। उन्होंने शिष्यों को आवाज़
दी। शिष्यों ने आश्रम छान मारा पर
बिल्ली मिली नही।
अब महात्मा ने कहा की अगर पेड़ से
बिल्ली नही बांधी गयी तो मै ध्यान मे कैसे
बैठूंगा? ये तो हमारे आश्रम की परंपरा है। फिर शिष्यों ने एक
बिल्ली ढूंड कर लायी। उसको पेड़ से बांधा गया, फिर महात्मा ध्यान
मे बैठे।
अब इस कहानी को आजकल के कुछ प्रचलित रिवाजों से तुलना कर के आप
खुद देखिये। मै एकाध उदहारण देता हू :
1) जो लोग जनेउ धारण करते हैं, वो सुसु करने के पहले उसको कान में लपेटते हैं।
ऐसा करना नियम है। वर्ना जनेउ अशुद्ध हो जायेगी।
अब आप उस समय को सोचिये जब जनेउ पहनने की प्रथा चालू हुई
होगी। पुरुष बैठ कर सुसु करते थे और शरीर
का उपरी भाग या तो वस्त्रहीन होता था या अंगोछा लेते थे। अब
वो कमर से निचे तक लटकते जनेउ को कान मे लपेट कर छोटा नही करते
तो वो धुल-मिट्टी से गन्दा होता। इसलिए
ऐसा करना व्यावहारिकता थी। अभी के ड्रेस के साथ या खड़े हो कर
urinal मे सुसु करते समय उसको कान मे लपेटने का क्या औचित्य है?
2) पहले मृत्यु महामारी से हुआ करती थी। गांव के
गांव ख़त्म हो जाते थे। उस स्थिति मे hygine maintain करना अनिवार्य होता था। इसलिये
मृत्यु के बाद परिवारवाले सदा, बिना तेल मसाला, भोजन करते थे। बाल जीवाणु के
लिये आश्रय स्थल होता है, इसलिए सर मुंडन करा लेते थे। अभी के
परिपेक्ष्य मे इस परंपरा की क्या आवस्यकता है?
3) इस्लाम मे बुरका और दाढ़ी का प्रचलन है। 1400 साल पहले
जहाँ इस्लाम शुरू हुआ वहां के मौसम के अनुसार शरीर और चेहरे
को तीखी धुप से बचाना अनिवार्य था। लेकिन हर जगह
तो वैसा weather नही है। फिर धर्म के नाम पर इसे थोपने
की क्या आवश्यकता है? अभी जो लड़कियां india मे बाइक
चलाती हैं वो बुरका से भी ज्यादा शरीर
को ढकती है , गर्मी के दोपहर मे। क्योंकि ये weather का डिमांड
है, धर्म का नही।
# ये धर्म को गलत कहने के उद्देश्य से नही लिखा मैने। मै बस अप्रासंगिक
रिवाजों की ओर ध्यान खीचना चाहता हू।