Thursday, November 16, 2017

वो लाल कंचा

"वाह भई ! बड्डे है मेरा और गिफ्ट दिया जा रहा है सुपुत्र को !"

विनीता ने झूठी नाराजगी के साथ ये बात रखी।

निशिकांत ने विनीता के बड्डे पर पत्नी के बजाय अपने 12 साल के बेटे व्योम को एक छोटा सा गिफ्ट बॉक्स पकड़ाया था।

गिफ्ट बॉक्स में एक रेड कलर का मार्बल बॉल और एक चिट्ठी या यूँ कहें कि एक कहानी थी... या कहानी न होकर कुछ और थी। ये तो व्योम ही बता पायेगा।

और ये गिफ्ट किसके लिए था ? व्योम के लिए या विनीता के लिए ? ये भी व्योम ही बता पायेगा या फिर इसका जवाब वक्त के गर्भ में छुपा हुआ है !

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"पापा, देखिये ये रेड वाली मार्बल बॉल मिली मुझे"

दीपावली की साफ-सफाई में गंदे हुए हाथों से निशिकांत ने 5 साल के व्योम को लगभग झकझोरते हुए उस मार्बल बॉल को ऐसे छिना मानो वो कांच की गोली न होकर कोई बेसकीमती हीरा हो।

विनीता भी भौंचक हो गईं और आश्चर्यमिश्रित गुस्से से कहा कि ऐसे क्यों रियेक्ट कर रहे !!!

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1,2,3,4,5,6,7.................. 1032.
एक-एक कर एक हज़ार बत्तीस कंचे कुएँ में समाते चले गए। 1033वां कंचा, लाल रंग का, उसने मुट्ठी में बांध कर रख लिया। तब वो उसका लकी कंचा हुआ करता था। "अड्डी" था वो कंचा....मतलब कंचे वाले खेल में उस कंचे को वो स्ट्राइकर की तरह यूज़ करता था।

      कंचे का चैंपियन। ढेर कंचे जीतता था। खेलते समय खाने-पीने का होश तक न रहता था। हाँ, पढाई का होश कभी न गंवाया।

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"बेटा, तुमसे कुछ कहना था।"

निशिकांत उस दिन जीते हुए कंचों को जार में रखते हुए कहा, "हाँ माँ, बोलो।"

"निधि के पिताजी कह रहे थे कि तुम बिगड़ रहे हो। दिन भर कंचे खेलते हो। बिन पिता के बच्चे ऐसे ही गँवार हो जाते हैं।"

"हूँ!" बस इतना ही जवाब दिया था उसने।

"तुम छोड़ दो कंचे खेलना।" माँ ने आगे कहा था।

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निधि के पिताजी कुछ चिढ की वजह से बोले हों या सच में concerned थे ये तो वही जानें क्योंकि ये कंचा खेलने वाला निशिकांत हर साल कक्षा में प्रथम आता था और दो-दो टूशन के बावजूद निधि 2nd आती थी।

       और उसी शाम 1,2,3,4,5,6,7.....1032 कंचे कुआं के अंदर समा चुके थे। उसने प्रण किया कि अब वो कभी कंचे नहीं खेलेगा क्योंकि माँ दुःखी हुईं थीं।

          और वो रेड स्ट्राइकर !

उसे वो लकी भी मानता था और इसलिए भी रख लिया कि ये उसे उसके प्रण की याद भी दिलाता रहेगा। ऐसा नहीं कि उसने फिर कभी माँ को दुःखी न किया हो, लेकिन वो कंचा उसे हर बार याद दिलाता था कि आगे दुबारा कोई गलती न करे...कम से कम same mistake न करे।

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Wednesday, November 15, 2017

विकास को रोकता स्पीड ब्रेकर

ऐसा है कि आज मैं एक बहुते बड़ा खबर लेकर आया हूँ। हर तरफ "विकास" को लेकर चर्चा होती है कि विकास कहाँ है, विकास क्यों नहीं हो रहा इत्यादि। तो इसी पर एक जबर खबर लाया हूं।

        अच्छा, सबसे पहले बता दूँ कि आज मेरा  हैप्पी बड्डे है।।एकदमे असली वाला। उ अइसे कि आज ही के दिन मेरे राज्य की स्थापना हुई थी। और बड्डे मनाने को राष्ट्रपति जी भी आये हुए हैं। शहर एकदम फुल ब्राइट चमक रहा है।

 
      हाँ, तो हमरे घर के पास एक "हज हाउस" है। oops, थोड़ा confusion है यहाँ। हज हाउस "था" या "है" या "होगा' ? पता नहीं, अब इसका tense बोले तो काल आपलोग ही तय कीजियेगा। पिछली सरकार ने हज यात्रियों के रुकने के लिए बहुमंजिला "हज हाउस" बनवाया था। फिर एंटी मुस्लिम गोरमिंट आ गई हियाँ और हज हाउस को पूरा तोड़ दिया। और तोड़ने के लिए न्यूज़ पेपर में छपने वाले खबर का हवाला दिया। मतलब डेली डेली छपता था कि निर्माण में ढेरे घोटाला हुआ है, कभी भी गिर सकता है, छत से पिलर अलग हो रहा है आदि इत्यादि अगड़म बगडम। अब एंटी माइनॉरिटी सरकार इसे फिर से बनवा रही है। लोग बाग कहते हैं कि इस बार व्यापारियों की सरकार, व्यापारियों को फायदा पंहुचाने के लिए ई मोटा- मोटा छड़(सरिया) और ई बढ़िया-बढ़िया सीमेंट डाल रही है। तो अब हज हाउस के लिए "था", "है" या "होगा"...क्या यूज़ किया जाए ?

           लेकिन हम main मुद्दा से भटक रहे हैं
वापिस आते हैं "विकास" पर। हाँ, तो हम रोज 6 बार हज हाउस के पास से गुज़रते हैं - दो बार  साइकिलिंग करते हुए और 4 बार ओफ्फिस आते जाते। और हर बार उस एरिया को हम बड़ी ही धीमी गति से पार करते हैं। न, न ...शीश नवाने को नहीं भई। वहाँ पर दो ठो बड़ा-बड़ा , ई बड़ा-बड़ा स्पीड ब्रेकर है/था/होगा ! फिर से confusion हो गया tense/काल को लेकर।
मतलब परसो तक तो हइये था। फिर कल देखे कि उसको काट के प्लेन कर दिया। लेकिन लगता है कि कल या जल्दी ही फिर बन जायेगा।

उ का है न कि आज हमारे राज्य का बड्डे है। और बड्डे मनाने राष्ट्रपति जी आये हैं। बहुत सारी विकास की घोषणाएं होने वाली है आज। और अब जब इतना सारा विकास का पैकेज लेकर उनका काफिला गुज़रेगा तो विकास को ब्रेक नहीं लगना चाहिए न ! इसलिए स्पीड ब्रेकर को तोड़ दिया गया।

यहाँ ई भी बताते चले कि ई जो स्पीड ब्रेकर था न, उ कांग्रेस सरकार ने इम्प्लांट किया था।

इसी स्पीड ब्रेकर के कारण विकास रुका हुआ था। अब इसे पहचान कर तोड़ दिया गया है तो आज विकास का पैकेज एकदम मक्खन की तरह मोरहाबादी मैदान से उड़ेगा।

जय झारखण्ड !
जय हिन्द !
वंदे मातरम्!
नमो नमः !